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लुधियाना(त्रिखा)

डॉ.प्रदीप अग्रवाल (समाज सेवक) ने कहा कि योग अपना कर खुश् रहे

टीम डिजिटल/ ( दैनिक उजाला,लुधियाना) june 11, 2017 02:30 pm
Reported By : राजीव त्रिखा,लुधियाना

लुधियाना(10जून)आज पत्रकारों से बातचीत के दौरान डॉ.प्रदीप अग्रवाल (समाज सेवक) ने समाज के लोगो को जागरूक करते होये कहा कि योग अपना कर खुश् रहे और अनुलोम विलोम को करने की विधि भी बताई और उसके लाभ भी डॉ.ने कहा कि जैसे शरीर की शुद्धि के लिए जैसे स्नान की आवश्यकता होती है, ठीक वैसे ही मन की शुद्धि के लिए प्राणायाम की आवश्यकता होती है। प्राणायाम से हम स्वास्थ्य और निरोगी होते हैं। इससे हम दीर्घायु बनते हैं। इसे करने से हमारी स्मरण शक्ति बढ़ती है और हम रोग मुक्त रहते हैं। इससे मन की चंचलता दूर होती है और मन एकाग्र होता है। अनुलोम विलोम एक तरह का प्राणायाम है जिसे करने से कई बिमारियों में आराम मिलती है। इसमें अनुलोम का अर्थ है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। अनुलोम विलोम में बार बार सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को दोहराया जाता है। लेकिन इस क्रिया को भी तीन प्रकार से करते हैं-धीरे धीरे या एक नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। अंदर ली हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुम्भक कहते हैं। अंदर ली हुई श्वास को धीरे धीरे या एक नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। इस प्रकार इन तीनों प्रक्रियां को एक नियंत्रित गति से करना ही अनुलोम-विलोम कहलाता हैं। अनुलोम विलोम करने का तरीका आप किसी खुली हवा में एक दरी बिछा लें।अब उस दरी पर अपनी कमर को एकदम सीधा करके पलथी मार कर बैठ जाएँ।अब दाएं हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छेद को बंद करें और बाएं नाक से सांस अन्दर की ओर धीरे धीरे खीचें और फिर बंद नाक यानि दाई नाक को धीरे धीरे खोलते हुए उससे सांस को बाहर की ओर धीरे धीरे छोड़ें।ठीक इसी प्रकार अब बाएं हाथ के अंगूठे से नाक के बाएं छेद को बंद करें और दाएं नाक से सांस अन्दर की ओर धीरे धीरे खीचें और फिर बंद नाक यानि बाएं नाक को धीरे धीरे खोलते हुए उससे सांस को बाहर की ओर छोड़ें।इस प्रकार इस प्रक्रिया को कम से कम 10 से 12 बार करें।नियमित अभ्यास से शरीर स्वास्थ्य और निरोगी रहता है।स्मरणशक्ति बढ़ती है।नियमित अभ्यास से शरीर कफ, पित्त आदि रोग से बचाव रहता हैं।नियमित करने से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं।दिल स्वस्थ रहता है। ऐसा करने से जब हम जब ज़ोर ज़ोर से सांस अंदर की ओर लेते हैं तो शुद्ध वायु शरीर के अंदर जाकर सभी दूषित तत्वों को बाहर निकाल देती है जिससे शरीर में रक्त संचार अच्छे से होने लगता है।मन की चंचलता दूर होती है और मन एकाग्रचित होता है। 10 मिनट अनुलोम-विलोम कर, सिरदर्द ठीक हो जायेगा । नकारात्मक चिन्तन से दूर, आनंद, उत्साह बढ़ जायेगा योगा अपनाये खुश् रहे तंदरूस्त रहे अपने मित्रों दोस्तों रिस्तेदार को इसके बारे में बातेये